‘स्कूल चलें हम’ की भावना को धरातल पर उतारता उच्च प्राथमिक विद्यालय महुई का प्रयास
सिद्धार्थनगर। शिक्षा किसी भी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। लेकिन कई बार विभिन्न पारिवारिक, सामाजिक अथवा व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पाते और धीरे-धीरे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर होने लगते हैं। ऐसे बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ना केवल अभिभावकों की ही नहीं, बल्कि विद्यालय और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। इसी सोच को सार्थक करते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय महुई, विकास क्षेत्र खुनियांव, जनपद सिद्धार्थनगर के प्रभारी प्रधानाध्यापक श्री अभय कुमार पांडेय ने एक संवेदनशील और प्रेरणादायक पहल की।
जनसंपर्क अभियान के दौरान विद्यालय परिवार को जानकारी हुई कि छात्र शिवा मौर्या लगातार विद्यालय से अनुपस्थित चल रहा है। छात्र की लगातार अनुपस्थिति को विद्यालय ने सामान्य विषय मानकर नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि इसे गंभीरता से लेते हुए बच्चे को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रयास शुरू किए।
पहले अभिभावकों से किया संवाद
शिक्षक ने सबसे पहले छात्र के माता-पिता से संपर्क किया। अभिभावकों को बच्चे की नियमित विद्यालय उपस्थिति के महत्व के बारे में समझाया गया। उन्हें बताया गया कि विद्यालय में नियमित उपस्थिति से बच्चे में पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित होती है और वह अपने सहपाठियों के साथ शैक्षिक एवं सामाजिक गतिविधियों में बेहतर ढंग से भाग ले पाता है।
अभिभावकों को बच्चे को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया गया। हालांकि, समझाने-बुझाने के बाद भी जब छात्र विद्यालय नहीं पहुंचा तो शिक्षक ने बच्चे तक स्वयं पहुंचने का निर्णय लिया।
शिक्षक ने घर पहुंचकर बच्चे से किया आत्मीय संवाद
शिक्षक बच्चे के घर पहुंचे और उससे आत्मीयता के साथ बातचीत की। बच्चे के साथ कठोर व्यवहार करने के बजाय उसकी परिस्थितियों और मनःस्थिति को समझने का प्रयास किया गया। उसे विद्यालय आने और पढ़ाई से दोबारा जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
शिक्षक ने बच्चे के प्रति अपनत्व और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उसे तैयार कराया और अपने साथ विद्यालय लेकर आया। इसके बाद छात्र को पुनः विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
यह पहल केवल एक अनुपस्थित छात्र को विद्यालय लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे यह सोच है कि बच्चा विद्यालय को अपने लिए एक सुरक्षित, सकारात्मक और अपनत्व भरा स्थान महसूस करे। जब बच्चे को शिक्षक का सहयोग और विश्वास मिलता है तो उसके भीतर विद्यालय आने और सीखने की इच्छा को मजबूत किया जा सकता है।
नामांकन से आगे बढ़कर नियमित उपस्थिति पर जोर
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अभय कुमार पांडेय का कहना है कि विद्यालय परिवार का उद्देश्य केवल बच्चों का नामांकन कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए उसे शिक्षा की मुख्यधारा में बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा लगातार विद्यालय से अनुपस्थित रहता है तो विद्यालय परिवार उसके कारणों को समझने और परिवार से संवाद करने का प्रयास करता है। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक स्वयं बच्चे और उसके अभिभावकों तक पहुंचकर उसे विद्यालय से जोड़ने की कोशिश करते हैं।
उनका मानना है कि एक शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। शिक्षक का दायित्व बच्चों के शैक्षिक विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, व्यवहार और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है।
एक बच्चे की वापसी, एक बड़ी उम्मीद
शिवा मौर्या को विद्यालय वापस लाने का यह प्रयास भले ही एक छोटे कदम के रूप में दिखाई दे, लेकिन इसके पीछे शिक्षा के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी और संवेदनशील सोच दिखाई देती है। किसी बच्चे का लगातार विद्यालय से दूर रहना भविष्य में उसकी शिक्षा और विकास को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में समय रहते विद्यालय परिवार द्वारा पहल करना निश्चित रूप से सराहनीय है।
यदि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों की समस्याओं को समझें और उन्हें सहयोग दें तो विद्यालय से दूर हो रहे कई बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सकता है।
‘स्कूल चलें हम’ सिर्फ नारा नहीं, जिम्मेदारी भी
‘स्कूल चलें हम’ की भावना केवल एक अभियान या नारा नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए जरूरी है कि विद्यालय केवल बच्चों के आने की प्रतीक्षा न करे, बल्कि जो बच्चे किसी कारणवश विद्यालय से दूर हो रहे हैं, उनके घर तक पहुंचकर उनसे संवाद भी करे।
उच्च प्राथमिक विद्यालय महुई की यह पहल इसी सोच को मजबूत करती है। यह समाज को संदेश देती है कि हर बच्चा महत्वपूर्ण है, हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है और किसी भी बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर नहीं रहने देना चाहिए।
शिक्षक और विद्यालय परिवार की संवेदनशील भूमिका
आज के समय में शिक्षा व्यवस्था में नामांकन बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण बच्चों को विद्यालय से जोड़े रखना भी है। नियमित उपस्थिति, सीखने की निरंतरता और विद्यालय के प्रति सकारात्मक वातावरण बच्चों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
उच्च प्राथमिक विद्यालय महुई के विद्यालय परिवार द्वारा छात्र शिवा मौर्या को घर से विद्यालय तक लाने का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशीलता, धैर्य और आत्मीयता के साथ किया गया एक छोटा प्रयास किसी बच्चे के भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है।
यह पहल न केवल विद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि अन्य विद्यालयों और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का संदेश देती है कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए आवश्यकता पड़ने पर उनके घर तक पहुंचना भी शिक्षक की जिम्मेदारी का हिस्सा बन सकता है।
संदेश स्पष्ट है—बच्चे को केवल स्कूल में दाखिला दिलाना पर्याप्त नहीं, उसे नियमित रूप से स्कूल तक लाना और शिक्षा की मुख्यधारा में बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।


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