कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिनकी शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटे-से संकल्प से होती है। सिया अधारजी की कहानी भी ऐसे ही एक संकल्प की कहानी है—एक ऐसी लड़की की, जिसने बिना किसी विशेष योजना और शुरुआती समर्थन के सामान्य वर्कआउट से शुरुआत की और अपनी मेहनत, अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर बॉडीबिल्डिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
19 मार्च 1995 को जमशेदपुर में जन्मीं सिया अधारजी ने B.Com की शिक्षा प्राप्त की और आज वह Physical Fitness Trainer के रूप में भी कार्य कर रही हैं। बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में उनकी प्रेरणा सोनाली स्वामी मैम रही हैं।
“लड़की हो, लोहा उठाओगी?”
सिया के सफर की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने यह रास्ता किसी विशेष तैयारी या मजबूत सपोर्ट सिस्टम के साथ शुरू नहीं किया था। शुरुआत में परिवार भी उनके इस फैसले के पक्ष में नहीं था। उनके पिता की एक बात—“लड़की हो, लोहा उठाओगी?”—सिया के लिए चुनौती बन गई।
जहाँ किसी और के लिए यह बात हतोत्साहित करने वाली हो सकती थी, वहीं सिया ने इसे अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने मन ही मन तय कर लिया कि वह साबित करेंगी कि महिलाएँ सिर्फ वजन उठा ही नहीं सकतीं, बल्कि अपने सपनों का भार भी अपने कंधों पर उठा सकती हैं और उन्हें हकीकत में बदल सकती हैं।
उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह बॉडीबिल्डिंग करेंगी। लेकिन जब उन्होंने अपने पहले शो की तैयारी शुरू की, तब उन्हें न तो पोज़िंग की जानकारी थी और न ही स्टेज का अनुभव। शुरुआती दौर में कोच का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
वह एक घंटे तक स्कूटी चलाकर कोचिंग लेने जाती थीं। साथ ही IT की नौकरी में नाइट शिफ्ट करने के बावजूद उन्होंने अपना वर्कआउट कभी नहीं छोड़ा। यह अनुशासन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
जब शरीर थक गया, लेकिन हौसला नहीं टूटा
प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान सिया के सामने सबसे कठिन समय तब आया, जब वह सख्त प्रोटीन डाइट पर थीं। शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा की कमी के बावजूद उन्हें अपनी तैयारी जारी रखनी थी।
थकान थी, मुश्किलें थीं और कई बार परिस्थितियाँ उनके खिलाफ थीं। लेकिन पिता की वही बात बार-बार याद आती—“लड़की हो, लोहा उठाओगी?”
सिया ने इस वाक्य को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी प्रेरणा बना लिया। तमाम सीमाओं और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने पहले बड़े प्रयास में 2019 में मिस झारखंड प्रतियोगिता में रांची में तीसरा स्थान हासिल किया।
यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं था। यह उस लड़की की पहली जीत थी, जिसने अपने लिए एक ऐसा रास्ता चुना था जिसे उसके आसपास के लोग शुरुआत में स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।
उपलब्धियों ने बदली सोच
पहली सफलता के बाद सिया का आत्मविश्वास बढ़ता गया और उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
सिया अधारजी की प्रमुख उपलब्धियाँ
2019 — Ms. Jharkhand, Ranchi
🥉 3rd Place
2022 — Sikkim & Puri Competitions
🏅 5th Place
2023 — Ranchi Open Ms. Jharkhand
🥈 2nd Place
2025 — Ms. Jharkhand, Jamshedpur
🏆 Best Physique
2026 — Ms. UP / Ms. India, Lucknow
🏆 Gold winner
हर उपलब्धि के साथ सिया ने सिर्फ मंच पर अपना स्थान नहीं बनाया, बल्कि अपने परिवार और समाज की सोच को भी बदलने का काम किया।
विरोध से प्रोत्साहन तक का सफर
शुरुआत में जिस परिवार को लगता था कि बॉडीबिल्डिंग लड़कियों के लिए सही रास्ता नहीं है, वही परिवार आज सिया को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
सिया अपनी इस यात्रा में अपनी माँ और पिता के योगदान को विशेष रूप से याद करती हैं।
वह अपनी माँ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन्होंने कभी उनकी डाइट तैयार करने में मना नहीं किया। उनके पिता भी धीरे-धीरे उनके सबसे बड़े समर्थकों में शामिल हो गए और प्रतियोगिताओं के लिए उनके साथ आगे आने लगे।
उनके कोच कुलदीप का भी उनके सफर में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका लगातार यह कहना—“तुझसे जरूर होगा चैंप, तू कर सकती है”—सिया के लिए आत्मविश्वास का स्रोत बना।
दो नौकरियाँ, कठोर ट्रेनिंग और एक बड़ा सपना
सिया की कहानी सिर्फ जिम और प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने जीवन को आर्थिक रूप से संभालने के लिए दो अलग-अलग नौकरियाँ भी कीं। नौकरी, नाइट शिफ्ट, ट्रेनिंग, डाइट और प्रतियोगिताओं की तैयारी—इन सभी को एक साथ संभालना आसान नहीं था।
कई दिन ऐसे आए जब उनका मन ट्रेनिंग करने का नहीं हुआ। कई बार लोगों ने उन्हें कहा—
“लड़की हो, हद में रहो।”
“शादी की उम्र हो रही है।”
“बॉडी मर्दों जैसी बन जाएगी।”
लेकिन सिया ने इन बातों को अपनी राह की दीवार नहीं बनने दिया। उन्होंने उन सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी, जो अक्सर महिलाओं को उनकी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकती हैं।
और अंततः 2026 में गोल्ड जीतकर उन्होंने उस मिथक को तोड़ दिया।
एक साधारण लड़की से प्रेरणा बनने तक
सिया अधारजी की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सफलता हमेशा संसाधनों से नहीं आती। कई बार सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज होती है—लगातार कोशिश करने की क्षमता।
जब शुरुआत में सपोर्ट नहीं मिला, उन्होंने खुद को संभाला।
जब अनुभव नहीं था, उन्होंने सीखा।
जब शरीर ने साथ नहीं दिया, उन्होंने धैर्य रखा।
जब लोगों ने सवाल उठाए, उन्होंने परिणाम से जवाब दिया।
और जब सफलता मिली, तो उन्होंने अपने परिवार को भी अपने साथ खड़ा पाया।
उनकी कहानी उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सिर्फ इसलिए छोड़ देती हैं क्योंकि उन्हें शुरुआत में समर्थन नहीं मिलता।
सिया का जीवन-मंत्र
सिया का एक स्पष्ट और मजबूत मंत्र है—
“जो सोचा है, वो जरूर करूँगी। हार नहीं मानूँगी।”
यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उनके पूरे सफर की पहचान है।
युवा पीढ़ी के लिए सिया का संदेश
सिया युवा पीढ़ी से कहती हैं कि जीवन में ऐसे दौर जरूर आएंगे जब आपको लगेगा कि अब आप आगे नहीं बढ़ सकते। कभी थकान होगी, कभी मन नहीं करेगा, कभी शरीर साथ नहीं देगा और कभी आसपास के लोग आपका समर्थन नहीं करेंगे।
लेकिन ऐसे समय में अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए।
“आज नहीं तो कभी नहीं” की भावना के साथ अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहना चाहिए।
उनके अनुसार सफलता के लिए तीन गुण बेहद जरूरी हैं
Stay Humble. Stay Consistent. Stay Patient.
विनम्र रहें, निरंतर रहें और धैर्य रखें।
यदि इन तीन गुणों को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया जाए, तो कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ, अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
एक नजर में सिया अधारजी
नाम: सिया अधारजी
पिता: अविजित अधारजी
माता: बिथिका अधारजी
जन्म: 19 मार्च 1995
जन्मस्थान: जमशेदपुर
शिक्षा: B.Com
पेशा: Physical Fitness Trainer
बॉडीबिल्डिंग प्रेरणा: सोनाली स्वामी मैम
प्रमुख उपलब्धि: 2026 में Ms. UP / Ms. India, Lucknow में Gold
प्रेरणा की कहानी, जो अभी जारी है
सिया अधारजी की कहानी किसी अंतिम मंजिल पर समाप्त नहीं होती। 2026 का गोल्ड उनके सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन उनका संकल्प अभी भी वही है—आगे बढ़ते रहना, सीखते रहना और अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाना।
उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि किसी सपने को पूरा करने के लिए सबसे पहले दूसरों की स्वीकृति नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास जरूरी है।
एक लड़की ने सवाल सुना—“लड़की हो, लोहा उठाओगी?”
उसने जवाब शब्दों से नहीं, अपनी उपलब्धियों से दिया।
आज वही लड़की दूसरों के लिए प्रेरणा बनकर खड़ी है, और सोशल मीडिया पर अपने इंस्टग्राम अकाउंट के जरिए महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रहीं हैं।
सिया अधारजी—एक नाम, एक संघर्ष और यह संदेश कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी सीमा अंतिम सीमा नहीं होती।


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