पेशाब में दिक्कत का मतलब हमेशा प्रोस्टेट कैंसर नहीं, उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कई गैर-कैंसर वाली समस्याएं भी हो सकती हैं
पुरुषों में बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं आम होती जाती हैं। पेशाब करने में परेशानी, बार-बार पेशाब आना या रात में कई बार उठना जैसे लक्षण सामने आते ही कई लोगों के मन में सबसे पहला डर प्रोस्टेट कैंसर का होता है। लेकिन जरूरी नहीं कि हर प्रोस्टेट की बीमारी कैंसर ही हो।
प्रोस्टेट से जुड़ी कई समस्याएं गैर-कैंसरकारी (Benign) होती हैं और उनका उचित जांच एवं उपचार से प्रबंधन किया जा सकता है।
क्या है प्रोस्टेट?
प्रोस्टेट पुरुषों की प्रजनन प्रणाली का एक छोटा-सा ग्रंथि है, जो मूत्राशय के ठीक नीचे स्थित होती है और मूत्रमार्ग के एक हिस्से को घेरती है। उम्र बढ़ने के साथ इसमें बदलाव होना सामान्य है।
प्रोस्टेट की प्रमुख समस्याओं में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH), प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर शामिल हैं।
1. BPH: प्रोस्टेट का बढ़ना, कैंसर नहीं
उम्र बढ़ने के साथ कई पुरुषों में प्रोस्टेट का आकार बढ़ जाता है। इसे Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) कहा जाता है।
इसमें प्रोस्टेट बढ़ने के कारण मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ सकता है और पेशाब से संबंधित कई परेशानियां हो सकती हैं, जैसे—
•पेशाब शुरू करने में परेशानी
•पेशाब की धार कमजोर होना
•बार-बार पेशाब लगना
•रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना
•पेशाब करने के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास
•अचानक तेज पेशाब लगना
महत्वपूर्ण बात यह है कि BPH कैंसर नहीं है और BPH होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को प्रोस्टेट कैंसर है।
2. प्रोस्टेटाइटिस भी हो सकता है कारण
प्रोस्टेट में सूजन या संक्रमण को Prostatitis कहा जाता है। यह अलग-अलग उम्र के पुरुषों में हो सकता है।
इसके साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेल्विक क्षेत्र में दर्द या कुछ मामलों में बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके कारण और उपचार व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
3. प्रोस्टेट कैंसर एक अलग बीमारी है
प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं में होने वाली कैंसरकारी वृद्धि है। कई मामलों में शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को कैंसर है या नहीं।
डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार PSA रक्त जांच, शारीरिक जांच, यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड/MRI तथा अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं। हर व्यक्ति में सभी जांच जरूरी हों, ऐसा नहीं है।
किसी जांच में PSA बढ़ा हुआ आने का अर्थ भी अपने-आप कैंसर होना नहीं है। PSA कई अन्य प्रोस्टेट स्थितियों में भी बढ़ सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेशाब से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है, बार-बार हो रही है या बढ़ती जा रही है, तो इसे केवल उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
•खास तौर पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें यदि:
•पेशाब बिल्कुल न हो पा रहा हो
•पेशाब में खून दिखाई दे
•तेज दर्द या बुखार के साथ पेशाब की समस्या हो
•पेशाब की समस्या अचानक काफी बढ़ गई हो
डर नहीं, सही जांच जरूरी
प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या सामने आने पर घबराने के बजाय सही चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना सबसे महत्वपूर्ण है। BPH, prostatitis और prostate cancer तीन अलग-अलग स्थितियां हैं, इसलिए उपचार भी अलग होता है।
सबसे जरूरी संदेश यही है—
“हर बढ़ा हुआ प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता, लेकिन हर प्रोस्टेट समस्या की सही जांच जरूरी है।”
उम्र बढ़ने के साथ पेशाब संबंधी लक्षणों को छिपाने या स्वयं दवा लेने के बजाय यूरोलॉजिस्ट/चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर है।


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