कुपोषण से तो बच गए भारतीय बच्चे, लेकिन अब घेर रहा है मोटापे का यह खतरनाक जाल! स्टडी में खुलासा


 भारत में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक नई चुनौती सामने आ रही है। जहां एक ओर कुपोषण (Malnutrition) से जुड़े कई संकेतकों में सुधार देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बचपन का मोटापा (Childhood Obesity) तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय बच्चों में कुपोषण और मोटापा एक साथ मौजूद रहने की स्थिति (Double Burden of Malnutrition) अब पहले से अधिक स्पष्ट हो रही है।

क्या कहती है स्टडी?

The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित अध्ययन में तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्म से 9 वर्ष की उम्र तक बच्चों का अनुसरण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जहां बचपन में कुपोषण (Thinness) की समस्या बनी रही, वहीं 7 से 9 वर्ष की उम्र के बीच ओवरवेट और मोटापे के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। 7 वर्ष की आयु में लगभग 5.2% बच्चे ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त थे, जो 9 वर्ष की उम्र तक बढ़कर 14.6% हो गए।

क्यों बढ़ रहा है बच्चों में मोटापा?

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

- जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन
- मीठे पेय पदार्थों की अधिक मात्रा
- मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम के कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम
- शारीरिक गतिविधि और आउटडोर खेलों में कमी
- अनियमित नींद और अस्वस्थ जीवनशैली
- परिवार की खान-पान की आदतें

मोटापा क्यों है चिंता का विषय?

बचपन का मोटापा केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है। इससे आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे:

- टाइप-2 डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- फैटी लिवर
- हृदय रोग
- जोड़ों की समस्याएं
- आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

माता-पिता क्या करें?

- बच्चों को रोजाना कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए प्रेरित करें।
- जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और शक्कर वाले पेय सीमित करें।
- घर का ताजा और संतुलित भोजन दें।
- फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें।
- स्क्रीन टाइम सीमित रखें।
- पर्याप्त और नियमित नींद सुनिश्चित करें।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शोधकर्ताओं का कहना है कि अब केवल कुपोषण से लड़ना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए ऐसी रणनीतियों की जरूरत है जो कुपोषण और मोटापा—दोनों समस्याओं को साथ लेकर चलें। इसके लिए गर्भावस्था से लेकर बचपन और स्कूल की उम्र तक पोषण, शारीरिक गतिविधि और नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

निष्कर्ष

भारत में बच्चों के स्वास्थ्य की तस्वीर बदल रही है। जहां कुपोषण से लड़ाई जारी है, वहीं मोटापा एक नई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहा है। स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम और परिवार की अच्छी जीवनशैली की आदतें ही बच्चों को इस दोहरे खतरे से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका हैं।

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