सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो परिस्थितियों से हार नहीं मानते। इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण हैं इरा सिंघल, जिन्होंने शारीरिक दिव्यांगता, सामाजिक चुनौतियों और प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद अपने सपनों को साकार किया। आज उनकी कहानी लाखों युवाओं, विशेषकर UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
बचपन से था प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना
उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली इरा सिंघल बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में रुचि रखती थीं। बचपन में अपने जिले में कई बार कर्फ्यू लगते देखा। हर बार लोग कहते थे कि "डीएम के आदेश पर कर्फ्यू लगाया गया है।" तभी उनके मन में प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना जन्मा।
शारीरिक चुनौती बनी हौसले की ताकत
इरा स्कोलियोसिस (Scoliosis) नामक बीमारी से प्रभावित हैं, जिसके कारण उन्हें लगभग 62 प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता है। हालांकि इस चुनौती ने उनके आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं किया। उन्होंने मेरठ के सोफिया गर्ल्स स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, इसके बाद दिल्ली के नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक. और दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई पूरी की।
दो बार UPSC पास, फिर भी नहीं मिली जॉइनिंग
इरा ने UPSC परीक्षा दो बार उत्तीर्ण की और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ। लेकिन दिव्यांगता के आधार पर विभाग ने उन्हें नियुक्ति देने से इनकार कर दिया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था।
उन्होंने हार मानने के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2014 में अपना मामला जीत लिया। इसके बाद उन्हें IRS अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली।
तीसरे प्रयास में बनीं UPSC टॉपर
IRS बनने के बाद भी इरा का लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) था। उन्होंने एक बार फिर UPSC परीक्षा दी और वर्ष 2014 में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही वे देश की पहली दिव्यांग महिला UPSC टॉपर बनीं और अपना IAS बनने का सपना पूरा किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
इरा सिंघल का जीवन यह संदेश देता है कि सफलता पाने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास मायने रखते हैं। उन्होंने साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो कोई भी चुनौती सफलता की राह नहीं रोक सकती।
आज इरा सिंघल देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका डटकर सामना करना ही सफलता की असली कुंजी है।


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