आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गैस, एसिडिटी, अपच और सीने में जलन जैसी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। अनियमित खानपान, तनाव, देर रात तक जागना, फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में तुरंत राहत पाने के लिए अधिकांश लोग गैस की दवाओं का सहारा लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के इन दवाओं का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
हाल ही में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, वर्षों तक लगातार गैस की दवा लेने वाले मरीजों में किडनी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया है।
1.30 लाख मरीजों पर किया गया अध्ययन
पीएमसीएच के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने ओपीडी में आने वाले लगभग 1 लाख 30 हजार मरीजों का अध्ययन किया। जांच में पाया गया कि 51,577 मरीज ऐसे थे जो पिछले 5 से 10 वर्षों से लगातार गैस की दवाओं का सेवन कर रहे थे। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिन्होंने बिना चिकित्सकीय परामर्श के स्वयं ही दवाओं का उपयोग जारी रखा।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि लंबे समय तक दवा लेने के बावजूद कई मरीजों की मूल समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। इसके विपरीत, उनके शरीर के अन्य अंगों विशेषकर किडनी और फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिले।
किडनी पर पड़ रहा है असर
विशेषज्ञों के अनुसार गैस की कुछ दवाओं का लंबे समय तक उपयोग किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। कई मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिले। कुछ गंभीर मामलों में किडनी फेल होने जैसी स्थिति भी देखी गई।
किडनी हमारे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। जब इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो शरीर में कई प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी दवा का लंबे समय तक सेवन डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का भी बढ़ा खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि लंबे समय तक गैस की दवा लेने वाले कई मरीजों में फेफड़ों के संक्रमण और श्वसन संबंधी समस्याएं अधिक देखी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ दवाओं के लंबे उपयोग से शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
फेफड़ों में संक्रमण होने पर खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द और बार-बार बुखार जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
बिना जांच के दवा लेना सबसे बड़ी गलती
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि पेट में गैस या एसिडिटी हमेशा एक सामान्य समस्या नहीं होती। कई बार यह पेट के अल्सर, लीवर रोग, पित्ताशय की बीमारी, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण या अन्य गंभीर रोगों का संकेत भी हो सकती है।
अक्सर लोग मेडिकल स्टोर से सीधे दवा खरीदकर महीनों या वर्षों तक सेवन करते रहते हैं। इससे बीमारी का वास्तविक कारण छिप जाता है और समय पर सही उपचार नहीं हो पाता।
क्यों बढ़ रही है गैस की समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न कारण गैस और एसिडिटी की समस्या को बढ़ा रहे हैं—
- अनियमित भोजन करना
- अधिक मसालेदार और तला-भुना भोजन
- फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन
- धूम्रपान और शराब का उपयोग
- अत्यधिक तनाव और चिंता
- पर्याप्त नींद न लेना
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- देर रात भोजन करना
डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह
पीएमसीएच के विशेषज्ञों ने लोगों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है—
1. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें
गैस की दवा केवल चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही लें। स्वयं उपचार से बचें।
2. लंबे समय तक सेवन न करें
यदि गैस या एसिडिटी की समस्या लगातार बनी रहती है तो जांच कराएं। केवल दवा खाते रहना समाधान नहीं है।
3. जीवनशैली में सुधार करें
संतुलित आहार लें, समय पर भोजन करें और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
4. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
ये आदतें पेट और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
5. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
लंबे समय से दवा ले रहे मरीजों को समय-समय पर किडनी और अन्य आवश्यक जांच करानी चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दवा का उपयोग आवश्यकता और निर्धारित अवधि के अनुसार ही होना चाहिए। गैस की दवाएं तत्काल राहत देती हैं, लेकिन इन्हें स्थायी समाधान मानकर वर्षों तक लेना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए यदि गैस, एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या बार-बार हो रही है तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श करें।
निष्कर्ष
गैस की दवा का लंबे समय तक और बिना चिकित्सकीय सलाह के सेवन करना किडनी, फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सकीय परामर्श ही इस समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और किसी भी दवा को नियमित रूप से लेने से पहले उसके लाभ और संभावित जोखिमों को अवश्य समझें।


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