विटामिन-डी की कितनी मात्रा है पोषण के लिए ज़रूरी? जानिए किन खाद्य पदार्थों से मिलता है Vitamin D


 विटामिन-डी शरीर के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह केवल हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों, प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) और नसों के सामान्य कार्य में भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी आज भारत समेत दुनिया के कई देशों में आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शरीर को रोजाना कितनी मात्रा में विटामिन-डी की जरूरत होती है और यह किन खाद्य पदार्थों से प्राप्त किया जा सकता है।

रोजाना कितनी मात्रा में Vitamin D की जरूरत होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यतः प्रतिदिन विटामिन-डी की आवश्यकता उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है:

- 0–12 महीने के शिशु: 400 IU (10 माइक्रोग्राम)
- 1–70 वर्ष की आयु: 600 IU (15 माइक्रोग्राम)
- 70 वर्ष से अधिक: 800 IU (20 माइक्रोग्राम)
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: सामान्यतः 600 IU (15 माइक्रोग्राम), लेकिन व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर सलाह दे सकते हैं।

«किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू न करें।»

किन खाद्य पदार्थों से मिलता है Vitamin D?

हालांकि भोजन से विटामिन-डी सीमित मात्रा में मिलता है, लेकिन ये स्रोत उपयोगी हैं:

1. फैटी फिश (तैलीय मछलियां)

- सैल्मन
- सार्डिन
- मैकेरल
- टूना

2. अंडे की जर्दी

अंडे की जर्दी में प्राकृतिक रूप से थोड़ी मात्रा में विटामिन-डी पाया जाता है।

3. फोर्टिफाइड दूध और डेयरी उत्पाद

कुछ दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पादों में अतिरिक्त विटामिन-डी मिलाया जाता है।

4. फोर्टिफाइड अनाज (Cereals)

कई नाश्ते के सीरियल और ओट्स विटामिन-डी से फोर्टिफाइड होते हैं।

5. मशरूम

विशेष रूप से यूवी लाइट के संपर्क में आए मशरूम विटामिन-डी का अच्छा स्रोत हो सकते हैं।

6. फोर्टिफाइड प्लांट-बेस्ड ड्रिंक्स

सोया, बादाम या ओट मिल्क के कुछ ब्रांड विटामिन-डी से समृद्ध किए जाते हैं।

धूप भी है Vitamin D का बड़ा स्रोत

शरीर सूर्य की अल्ट्रावायलेट-बी (UVB) किरणों की मदद से स्वयं विटामिन-डी बनाता है। नियमित रूप से सीमित समय तक धूप में रहना मददगार हो सकता है, हालांकि इसकी अवधि त्वचा के रंग, मौसम, स्थान और समय पर निर्भर करती है।

Vitamin D की कमी के लक्षण

- हड्डियों में दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी
- बार-बार थकान
- बार-बार संक्रमण होना
- बच्चों में हड्डियों के विकास में समस्या

किन लोगों में कमी का खतरा अधिक होता है?

- बुजुर्ग
- घर के अंदर अधिक समय बिताने वाले लोग
- गहरे रंग की त्वचा वाले व्यक्ति
- मोटापे से ग्रस्त लोग
- कुछ आंतों या लिवर-किडनी की बीमारियों वाले मरीज

निष्कर्ष

विटामिन-डी शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, सुरक्षित धूप और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेने से इसकी कमी को रोका जा सकता है। यदि आपको लगातार थकान, हड्डियों में दर्द या मांसपेशियों की कमजोरी महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन-डी की जांच कराएं।

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